उन्होंने सीएनएन टीवी से बात करते हुए कहा कि अमरीका को एक बीमारी है और वह है प्रतिबंध की लत। उन्होंने कहा कि अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के काल में भी यह देश प्रतिबंधों को हटाने से अधिक प्रतिबंध लगाने पर बल देता था। ज़रीफ़ ने 19 अगस्त वर्ष 1953 में अमरीका द्वारा ईरान में कराए गए विद्रोह की ओर इशारा करते हुए कहा कि अमरीका अब भी यही सोचता है कि वह उस सरकार से सहयोग कर रहा है जिसे उसने 1953 में विद्रोह के बाद सत्ता में पहुंचाया था लेकिन उसे अब निश्चेतना की नींद से जाग जाना चाहिए।
ईरान के विदेश मंत्री ने अमरीका के साथ किसी भी प्रकार की वार्ता को रद्द करते हुए कहा कि परमाणु समझौता अमरीका के लिए एक इम्तेहान था लेकिन उसने बड़ी आसानी से इस समझौते का उल्लंघन कर दिया और अब पुनः वार्ता के लिए अमरीका पर भरोसा नहीं किया जा सकता। मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने इस बात का उल्लेख करते हुए यूरोपीय देशों का दबाव अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प को अपने विचार बदलने पर बाध्य करेगा, कहा कि आज अमरीका के सबसे घनिष्ठ घटक भी ईरान के ख़िलाफ़ उसके प्रतिबंधों का विरोध कर रहे हैं लेकिन वाॅशिंग्टन अपने यूरोपीय घटकों के साथ ग़ुंडगर्दी वाल व्यवहार कर रहा है। ईरान के विदेश मंत्री ने अपने देश की जनता पर अमरीका की ओर से पिछले चालीस साल से डाले जा रहे दबाव की ओर संकेत करते हुए कहा कि ईरानी जनता, अमरीकी दबाव के सामने डटे रहेगी और इस दबाव से उस पर कोई असर नहीं पड़ेगा।